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मैं कौन हूँ| Mai kaun hun| Poetry by Neha Jha |Meethi Chutney (Hindi)


मैं कौन हूँ, मैं कौन हूँ
मैं तो मैं में ही संपूर्ण हूँ
दुनिया के शोरगुल में, सुबह की अज़ान हूँ
किसी के निराशा की वजह नहीं, उसकी शान हूँ
हूँ कोयले का अंगार या पहेलियों का जाल
अपनी क़िस्मत का आकार हूँ
कर्म की ललकार हूँ
हूँ धरती का अंश मैं, या उसका सारांश हूँ
शांति की लहर हूँ या मौसम का क़हर हूँ

मैं कौन हूँ, मैं कौन हूँ
मैं तो मैं में ही संपूर्ण हूँ
हूँ नियती के इशारों का शिकार
या मैं ही परवरे-दिगार हूँ
संसार का अहंकार हूँ
ख़ुदा के रूह की पुकार हूँ
हूँ गुजरा हुआ कल या मैं ही काली का काल हूँ
हूँ कठपुतली समय की या उसका संहार हूँ

मैं कौन हूँ, मैं कौन हूँ
मैं तो मैं में ही संपूर्ण हूँ
अज्ञात हूँ, अनंत हूँ या फिर सूर्य-प्रकाश हूँ
मेरे इकछायों की सीमा नहीं, मैं उजला आकाश हूँ
क़िस्मत के आधीन नाहीं, उसकी लकीर हूँ
मोहमाया के जंजाल में, मैं अछूत फ़क़ीर हूँ
हर सवाल का जवाब हूँ
मैं जीवन का शबाब हूँ
तोड़ के देख लो मुझे, हिम्मत लाजवाब हूँ

मैं कौन हूँ, मैं कौन हूँ
मैं तो मैं में ही संपूर्ण हूँ
मैं रातों से क्या डरूँ, मैं अंधेरों का यार हूँ
आंधियाँ क्या गिराएँगी मुझे, मैं खुद उन पर सवार हूँ
शिव की शक्ति हूँ मैं, वेदों का ज्ञान हूँ
भ्रष्ट दुनिया के जाल में, मैं पुनर्विराम हूँ
वक़्त ना भूल सके, मैं वो हसीन दास्तान हूँ
हूँ अपना अभिमान मैं, अपनी ही पहचान हूँ।

मैं कौन हूँ, मैं कौन हूँ
मैं तो मैं में ही संपूर्ण हूँ।

Checkout the video:
https://youtu.be/9GdoX-R3TkI

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