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कमबख़्त वक़्त | Kambakht Waqt | Poetry by Neha Jha |Meethi Chutney (Hindi)

 


                                                                        कमबख़्त वक़्त

आज मेरा वक़्त क्या पैग़ाम लाया है
झोले भर ख़ुशियाँ या ग़म तमाम लाया है

लाया है जुगनू सी चाँदनी या सूरज-सी रोशनी
कड़वाहट का काढ़ा या चाशनी की मिठास
रोज़मर्रा की भागदौड़ या लाया है आज, कुछ ख़ास
दिन की माश्रूफ़ीयत या इत्मिनान की शाम
मेरे ख़यालों से छुट्टी या फिर दिल के लिए कोई काम?

सागर की गहरायी या आसमानो की आज़ादी लाया है ?
मेरे ख़ुशियों की आबादी या अरमानो की बर्बादी लाया है?
लाया है आँधी संग बारिश या सुबह की मख्मली धूप?

सपनो की सच्चाई या फिर उन से समझौता
अपनो का असली चेहरा या फिर से कोई मुखौटा?

सुना है वक़्त तेरी तो फ़ितरत है बदलने की
जो तुझे भा जाए उसी के साथ चलने की
मैं तो आज भी उसी मोड़ पर तेरा इंतज़ार कर रही हूँ
मैं भी तुझे भा जाऊँ, मिन्नतें हज़ार कर रही हूँ
कभी ज़मीन तो कभी आसमाँ ढूँड़ रही हूँ
कम्बख़्त वक़्त तेरा पता तो मैं आज भी ज़रे-ज़रे से पूछ रही हूँ।

Checkout the video:
https://youtu.be/gbgQfgY3JBM

Yaadon Ki Neev | Poetry by Neha Jha |Meethi Chutney (Hindi)

 


यादों की नीव

बचपन से जिसे घर कहते थे
आज उसे छोड़ने का वक़्त आया है
साथ ले जा रहे हैं वो सारी यादें
जो सालों से घर में संजोई थी
वह सारे दिन, सारी रातें
बचपन से लड़कपन की सारी बातें
यह सारी शैतानियाँ, यह सारी मनमानियाँ

कुछ मुस्कुराते हुए लम्हे
कुछ दिल दुखाने वाले पल
यह सारी सुबह जब घर से बाहर जाने का जी नहीं चाहता था
यह सारी रातें जब लौटकर घर , आनंद आता था
यह सारे पल जब ज़िंदगी ख़ुशी से हँसती थी
और वह सारी रातें जब चैन की नींद घर यह मेरी सोती थी

नए घर जाने की ख़ुशी या इसे छोड़ने का ग़म, पता नहीं आज क्या ज़्यादा है?
अफ़सोस तो यह भी करेगी मेरे जाने पर
इंतज़ार शायद इसे भी रहेगा मेरे लौट आने का
छुप-छुप कर यह भी मुझे रोज़ मिस किया करेगी
मेरे क़िस्से याद कर, अकेले में मुस्कुराया करेगी।

और मैं भी इस घर की हर दिवार, हर छत, हर कोने की तस्वीर साथ लिए जा रही हूँ
धीरे- धीरे इस घर की यादों को सम्भाल कर, समेत रही हूँ।

नए घर की दीवारें भी इतना प्यार करे यह उम्मीद करती हूँ
तुझ जैसे यह भी हर धूप, हर बारिश में हाथ थामे यही चाहती हूँ

वहाँ जाकर भी हर सवेरे तुझे याद किया करूँगी,
नए घर की दिवारों में तेरी परछाई खोजा करूँगी।
ए घर तू भी मुझे याद रखना
कभी लौटकर आयी तो, पहचान कर मुस्कुरा देना।


Checkout the video:
https://youtu.be/gzFCpmQdEgc

Thank You Papa ~ Poetry by Neha Jha



थैंक यू पापा

बेटी हुई है, किसिने अफ़सोस जताते हुए कहा,
पर पापा की ख़ुशी का तो ठिकाना न रहा
दौड़ कर वे कमरे में आए,
हाथों को छूकर, माथे को चूम कर
पहली बार ख़ुशी के आंसू बहाए।

पहली बार जब अपने पैरों पर हुई खड़ी
पापा की ही तो उँगली पकड़ कर हुई बड़ी,
साइकल चलाना भी पापा ने ही सिखाया
सही-ग़लत का फ़र्क़ भी तो उन्होंने ही बताया।

स्कूल में कभी जब काम नम्बर आते थे
पापा तो तब भी शाम में हमें बाहर खाने पर ले जाते थे
किसी और से नहीं, खुद से बेहतर बनो
अपने मन की आवाज़ सुनो
यह पापा ने हमेशा ही सिखाया
सच होते हैं सपने यह उन्होंने खुद दिखाया

ज़िंदगी से जब कभी हार जाती थी
पापा की बातों से ही फिर से हिम्मत जुटा पाती थी।

हफ़्ते भर की थकान की बाद भी पापा
संडे को घुमाने ले जाते थे
फिर भी कभी हम से यह, न जताते थे

पापा अपने जूते सालों चलाते थे
पर हमारे लिए हर मौसम, नए लाते थे
अपने सुख की चिंता न की
दुख अपना कभी दिखाया नहीं
परेशान हैं वो भी, यह कभी जताया नहीं।

पापा ने हमें कभी बेटों से काम नहीं माना
कहते हैं अब तो पढ़ कर भी अनपढ़ है ज़माना

थैंक यू पापा हमें सपने दिखने के लिए
थैंक यू पापा हमें ज़िंदगी का असली मतलब समझाने के लिए
थैंक यू पापा हमें उड़ना सिखाने के लिए
थैंक यू पापा हर ठोकर पर उठाने के लिए
थैंक यू पापा हमें सक्षम और मज़बूत बनाने के लिए
थैंक यू पापा हमें अपनी बेटी बनाने के लिए

थैंक यू पापा।


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https://youtu.be/s01q8uh2DBs