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Yaadon Ki Neev | Poetry by Neha Jha |Meethi Chutney (Hindi)

 


यादों की नीव

बचपन से जिसे घर कहते थे
आज उसे छोड़ने का वक़्त आया है
साथ ले जा रहे हैं वो सारी यादें
जो सालों से घर में संजोई थी
वह सारे दिन, सारी रातें
बचपन से लड़कपन की सारी बातें
यह सारी शैतानियाँ, यह सारी मनमानियाँ

कुछ मुस्कुराते हुए लम्हे
कुछ दिल दुखाने वाले पल
यह सारी सुबह जब घर से बाहर जाने का जी नहीं चाहता था
यह सारी रातें जब लौटकर घर , आनंद आता था
यह सारे पल जब ज़िंदगी ख़ुशी से हँसती थी
और वह सारी रातें जब चैन की नींद घर यह मेरी सोती थी

नए घर जाने की ख़ुशी या इसे छोड़ने का ग़म, पता नहीं आज क्या ज़्यादा है?
अफ़सोस तो यह भी करेगी मेरे जाने पर
इंतज़ार शायद इसे भी रहेगा मेरे लौट आने का
छुप-छुप कर यह भी मुझे रोज़ मिस किया करेगी
मेरे क़िस्से याद कर, अकेले में मुस्कुराया करेगी।

और मैं भी इस घर की हर दिवार, हर छत, हर कोने की तस्वीर साथ लिए जा रही हूँ
धीरे- धीरे इस घर की यादों को सम्भाल कर, समेत रही हूँ।

नए घर की दीवारें भी इतना प्यार करे यह उम्मीद करती हूँ
तुझ जैसे यह भी हर धूप, हर बारिश में हाथ थामे यही चाहती हूँ

वहाँ जाकर भी हर सवेरे तुझे याद किया करूँगी,
नए घर की दिवारों में तेरी परछाई खोजा करूँगी।
ए घर तू भी मुझे याद रखना
कभी लौटकर आयी तो, पहचान कर मुस्कुरा देना।


Checkout the video:
https://youtu.be/gzFCpmQdEgc

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