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Thank You Papa ~ Poetry by Neha Jha



थैंक यू पापा

बेटी हुई है, किसिने अफ़सोस जताते हुए कहा,
पर पापा की ख़ुशी का तो ठिकाना न रहा
दौड़ कर वे कमरे में आए,
हाथों को छूकर, माथे को चूम कर
पहली बार ख़ुशी के आंसू बहाए।

पहली बार जब अपने पैरों पर हुई खड़ी
पापा की ही तो उँगली पकड़ कर हुई बड़ी,
साइकल चलाना भी पापा ने ही सिखाया
सही-ग़लत का फ़र्क़ भी तो उन्होंने ही बताया।

स्कूल में कभी जब काम नम्बर आते थे
पापा तो तब भी शाम में हमें बाहर खाने पर ले जाते थे
किसी और से नहीं, खुद से बेहतर बनो
अपने मन की आवाज़ सुनो
यह पापा ने हमेशा ही सिखाया
सच होते हैं सपने यह उन्होंने खुद दिखाया

ज़िंदगी से जब कभी हार जाती थी
पापा की बातों से ही फिर से हिम्मत जुटा पाती थी।

हफ़्ते भर की थकान की बाद भी पापा
संडे को घुमाने ले जाते थे
फिर भी कभी हम से यह, न जताते थे

पापा अपने जूते सालों चलाते थे
पर हमारे लिए हर मौसम, नए लाते थे
अपने सुख की चिंता न की
दुख अपना कभी दिखाया नहीं
परेशान हैं वो भी, यह कभी जताया नहीं।

पापा ने हमें कभी बेटों से काम नहीं माना
कहते हैं अब तो पढ़ कर भी अनपढ़ है ज़माना

थैंक यू पापा हमें सपने दिखने के लिए
थैंक यू पापा हमें ज़िंदगी का असली मतलब समझाने के लिए
थैंक यू पापा हमें उड़ना सिखाने के लिए
थैंक यू पापा हर ठोकर पर उठाने के लिए
थैंक यू पापा हमें सक्षम और मज़बूत बनाने के लिए
थैंक यू पापा हमें अपनी बेटी बनाने के लिए

थैंक यू पापा।


Checkout the video:
https://youtu.be/s01q8uh2DBs

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